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वीर कान्हड़देव सोनगरा - जिसकी बहादुरी देख खिलजी दुम दबाकर भागा

भारत के इतिहास में अनेकों वीर राजाओं की अनगिनत वीरगाथाएं भरी पड़ी हैं. लेकिन कई शौर्यगाथाएं अनसुनी रही हैं. पराक्रमी राजा कान्हड़देव की शौर्यगाथा ऐसी ही अनसुनी गाथाओं में से एक है. युद्ध के मैदान पर कान्हड़देव ने अकेले खिलजी के 50 योद्धाओं को अपनी कुशलता और पराक्रम से मौत के घाट उतार दिया था.


जालौर के वीर कान्हड़देव सोनीगरा जिन्होंने अल्लाउद्दीन ख़िलजी से छीनी सोमनाथ मंदिर से लूटी हुयी मुर्तिया और बनवाया भव्य मंदिर


राजपुताना हमेशा धर्म की रक्षा में आगे रहा है कण कण में वीरो का बलिदान है ऐसा कोई गाव नही जहा राजपूत झुंझार की देवालय छतरिया न हो

वक़्त 12वीं शताब्दी जब भारत तुर्को के जिहादी हमले झेल रहा था उसी समय जालौर में चौहानो

की शाखा सोनीगरा में महाराजा सामंत सिंह के यहाँ जन्म हुआ वीर कान्हड़देव का जो आगे चल कर जालौर के राजा बने

उनके कुशल नेतृत्व में जालौर की सीमाये सुदृढ़ हुयी और कान्हड़देव जी स्वर्णगिरी दुर्ग से राज्य चलने लगे

राज्य में एक से बढ़ कर एक योद्धा थे


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उसी समय अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने गुजरात में आक्रमण किया और बहुत मार काट मचाई उसने हिन्दुओ के 12 ज्योतीर्लिंग में से एक सोमनाथ महादेव के मंदिर को 1298 ईस्वी में पुनः लूटा और हजारो लोगो को गुलाम बना कर अल्लाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने सेनापति उलुग खा के साथ उत्तर की तरफ रुख किया


गुजरात के शहरो को तबाह करते हुए अल्लाउद्दीन की सेना 1299 ईस्वी में राजपूताने में प्रविष्ट हुयी और जालोर राज्य में साकरना गाव के पास डेरा लगाया


जब ये बात कान्हड़देव जी पता चली तो उनकी भुजाये फड़कने लगी और अपने 4 राजपूत वीर योद्धा जिनमे कांधल जी और जैता देवड़ा जैसे बाहुबली थे उन्हें दूत बनाकर सकराणे भेजा


अल्लुद्द्दीन ख़िलजी ने चारो के सामने आते ही ख़िलजी ने कहा जो भी आता है वो हमारे दरबार में शिश झुकाकर आता तब योद्धा राजपूतो ने जवाब दिया और कहा की हमारा सिर सिर्फ मौत के वक़्त ही झुक सकता है इतना सुनते ही ख़िलजी आग बाबुला हुआ

और ऊपर की और एक तीर छोड़ा जो सीधा जा रही चील लो लगा और सैनिको को आदेश दिया की ये नीचे नही आना चाईए फिर क्या था सैनिको ने एक के बाद एक इतने तीर छोड़े की वो चील नीचे ही नही गिरी


कांधल समझ चुके थे की ख़िलजी शक्ति प्रदर्शन करवा रहा है तब वहा डेरे में पास ही खड़े एक भैंसे को कांधल ने एक ही वार में दो टुकड़े कर डाले तभी वजीर ने बीच बचाव करते हुए कहा की ये राजपूत है अखड़ स्वाभाव के होते है चारो वीर वहा अल्लाउद्दीन को चेतवानी देकर आ गए


किल्ले में पहुचते ही सार बात कान्हड़ देव सोनीगरा को बताई उन्हें पता चला की सोमनाथ शिवलिंग के साथ उन्होंने महिलाओं बच्चों को भी कैद कर रखा है


इतना सुनते ही कान्हड़ देव ने प्रतिज्ञा की

'वह जब तक सोमनाथ महादेव शिवलिंग को एवं बंदियों को मुक्त नहीं करवा देगा, तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेगा'

किल्ले में विश्वनीय योद्धाओ और तैयार किया गया पूरी सेना को दो भागो में बाटा एक टुकड़ी का नेतृत्व

जैता/जैत्र देवड़ा कर रहे थे

आधी रात को किले से सेना निकली और 9 कोस दूर सकरने के पास रुकी सुबह के पहर में अपने से 10 गुणी बडी सेना पर अचानक हमला किया गया अचानक हुए इस हमले से तुर्क हक्के बक्के रह गए एक टुड़की ने औरतो बच्चों को छुड़ाया और लूटी मूर्तियो को अपने कब्जे में लिया वहा दूसरी टुकड़ी ने तब तक तुर्को को उलजाये रखा इसी बीच अल्लाद्दीन भाग निकला वही अल्लाउद्दीन का भतीजा हाथ लग गया जैत्र देवड़ा ने एक वार से उसके दो टुकड़े कर दिए तुर्को की लाशें बीच गयी

कांधल ने आईजुद्दीन व नाहर नाम के दो तुर्क अधिकारीयो को मार गिराया

राजपूतो के अद्वितिय पराक्रम दिखाया

सुबह होने सब वीर किल्ले में लौट आये कान्हड़देव ने अपना वचंन पूरा किया वही कुछ मूर्तिया वीर राजपूत योद्धा और विश्वनीय चारणो और राजपुतोहितो से सोमनाथ भिजवाई वही दूसरी मूर्तियो को जालोर के मकराणे गाव में हवन द्वारा वाला स्थापित कर मंदिर बनवाया


पर कुछ ही वक़्त बाद अल्लाउदीन एक विशाल फ़ौज लेकर जालोर आया किल्ले को कई माह तक संघर्ष चला अल्लाउद्दीन ने किल्ले घेरे रखा पर अंत में एक राशन खत्म होने की वजह हजारो राजपुतानियो ने महारानी केवल दे, जैतल दे,भवल दे जौहर की रस्म पूरी की और अपने सतीत्व की रक्षा के लिए आगे में कूद पड़ी

"गढरी परधी घेर, बैरी रा घेरा पड़या।

सत्यां काली रात ने, जौहर सूं चनण करी।।"


वही हजारो राजपूत अन्तिम सांस तक लड़े इस बारे में कहा गया

द छूटे जालोर !!"

"आभा फटे धर ऊलटे,कटे बखतरा कोर, फूटे सिर धड फड़फडे, ज

सन्दर्भ : -

कान्हड़ देव् प्रबन्ध

मुहणोत नैणसी भाग 1


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